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April 16, 2014 / Gyanesh Pandey

पढ़े लिखे ये बे-ईमान

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चले चलाने अपनी दुकान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
कविता पढ़ना, थ्योरी गढ़ना 
कोठे सा इनका संसार 
जो दो पैसे देदे इनको 
उसका देखो करते गान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
 
मानवाधिकार का रूप ये धरकर 
आतंकी का साथ है करते 
धरना करें ये सुबहो-शाम 
मानव जनम का करें अपमान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
सेक्यूलरिस्म का नारा जपते
संप्रदाय में फूट डालते 
झंडा कोर्ट या संविधान 
सबका करते यह अपमान 
पढ़े लिखे यह बे-ईमान 
 
मर्यादा का मान नहीं है 
नियम नीति में रूचि नहीं है 
करेंगे देश का काम-तमाम 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
अंग्रेजी में खिट-पिट करते 
जगह क्षेत्र का नहीं है ज्ञान 
सत्ता इनका  खेत खलिहान 
ये क्या जाने कृषि किसान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
बातें हैं ये खूब बनाते 
रंग रूप में सबसे आगे 
जाने ना गेंहू क्या धान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
कभी न जाएँ मंदिर-मस्जिद 
कभी करें न दुआ-सलाम 
चुनावों  में पहन के ताक़ीआ  
अल्लाह को करते बदनाम 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
आओ मिलके भारतवासी 
चलें साथियों अबकी कासी 
खूब बजाये इनके कान 
पढ़े लिखे ये बे-ईमान 
 
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