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April 28, 2012 / Gyanesh Pandey

एक जार में अचार (Pickled)

एक जार में अचार (Pickled) 
मुझे हमेशा लगता था कि मेरे अन्दर कई लोग बसते हैं  लेकिन कभी इतने प्रत्यक्ष रूप में उनको देखा नहीं था|  आज सुबह उठा तो मैंने पाया कि  मैं एक सुपरमार्केट के एक शेल्फ पे एक जार में बंद हूँ| मैं वहाँ अकेला नहीं हूँ, मेरे साथ मेरे हमशक्ल और साथी भाई भी हैं |
दुविधा यह है कि आज मुझे एक एक्टिंग के काम के लिए किसी से मिलने जाना है| काम बहुत ज़रूरी है क्यूंकि कम से कम एक महीने का घर का किराया निकल आएगा, अगर काम मिल गया तो! कल मैंने काफी समय और पैसे भी खर्च किये – बाल कटवाए, दाढ़ी बनायीं, हाथों पैरों के नाखून काटे, शाम को नहा के थोड़ी देर ध्यान भी किया | ध्यान करने के बाद एक्टिंग करना ज्यादा सहज हो जाता है, मन में जब कोई पहले से ख्याल न हों तो अपने  डाईलॉग्स भी अच्छे से याद होते हैं और परफोर्म करने में भी एक हल्कापन महसूस होता है |खैर इतनी सब तय्यारी का क्या फायदा, अब तो मैं यहाँ एक जार में बंद बैठा हूँ अपने कुछ हम-जारों के साथ| मुझे कैसे भी करके इस जार में से बाहर निकलना है और ऑडिशन के लिए जाना है|
अन्दर एक अजीब सा गुलाबी रंग का पदार्थ है, जिसमें हम तैर रहे हैं| बड़ा प्रयास करके मैं जार के ऊपरी भाग की तरफ गया, सोचा की ढक्कन पे थोड़ा जोर लगाया जाये| जोर लगाना बिल्कुल सहज नहीं है, आप तैरते-तैरते किसी चीज़ पे कैसे जोर डाल सकते हैं| खैर मैंने अपने हाथ-पैर जार की किनारियों पे टिकाये और एक हाथ से ढक्कन पे जोर लगाया, ढक्कन तो टस से मस न हुआ, जो हाथ मैंने जार की दीवार से लगाया हुआ था, वो फिसल गया| इस ग्लास में यह पदार्थ कई दिनों से होगा, जिसके रहते इसकी दीवारें थोड़ी चिकनी, फिसलने वाली हो गयीं हैं| हाथ फिसला तो मैं यूं नीचे की ओर गिरा, सर के बल| भला हो इस पदार्थ का, तले तक पहुँचने से पहले ही गति इतनी धीमी हो गयी थी की कुछ चोट नहीं लगी| इस जार में बिलकुल वैसे ही गति है जैसी चाँद पे इंसान की होती होगी – आपने एक विडियो देखा होगा जिसमें नील आर्मस्ट्रोंग चाँद पर चलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्लो मोशन में कूद रहे हैं|
दुबारा ढक्कन खोलने की हिम्मत नहीं है मुझमें| मैं निराश जार के तले पे आराम से लेट गया और सोचने लगा कि क्या करना चाहिए| कुछ भी सोचना न हुआ सिर्फ इस बात की चिंता रही कि अगले महीने का रेंट कहाँ से आएगा | बहुत सारा उधार ले चुका हूँ | वैसे ऐसा नहीं है कि अगर मैं एक्टिंग नहीं करूंगा तो मेरा पेट ख़राब हो जायेगा या बुखार आ जायेगा, लेकिन यह एक्टिंग की आदत, या यूं कहिये एक्टिंग करने की लालसा किसी बीमारी से कम नहीं है – और कम से कम मुझे तो इसका इलाज मालूम नहीं है | मेरे पिताजी का कहना है कि इसका इलाज है – शादी! मेरे पिताजी का सेन्स ऑफ़ ह्यूमर अच्छा है| उन्होंने आज तक कुछ भी करने के लिए मुझपे जोर नहीं दिया| लेकिन जब उन्हें पता चला की मैं इस काम को करने जा रहा हूँ, तो उन्होंने कभी एक शब्द भी हौसला अफजाई का नहीं कहा | अब कई साल हो गए हैं मुझे इस फील्ड में, और थोड़ा बहुत अच्छा बुरा काम कर ही लिया है | थोड़ी वाह-वाही भी हुई है काम की, लेकिन जो कहो की इससे दिनचर्या चलने का जुगाड़ हो जाए तो वो बहुत दूर की बात है | अब उम्र भी तीस के पार की हो गयी है – मेरे ज़्यादातर दोस्तों की शादियाँ भी हो चुकी हैं | वास्तव में कईयों के बच्चे भी हो गए हैं – बहुत ही कम कुछ एक दो सर-फिरे हैं हमारी तरह जो किसी न किसी प्रकार की वांडर-लस्ट को लेके भटक रहे हैं |
मैं इसी सब उधेड़-बुन में लगा हुआ था तभी मेरे हम-जारों में से मुझे अपना कॉमिक वर्ज़न दिखा, एक हलकी सी मन में मुस्कान आई| मैंने सोचा की इससे बात करके कुछ करते हैं, शायद किसी विंडो-शोप्पर को लुभाया जा सके और उससे ढक्कन खुलवाया जा सके| फिर मन में ख्याल आया की कॉमिक ही क्यूँ, बाकी सब की भी मदद ली जाए| इनमें से एक वर्ज़न था गवैये जैसा, एक था जो काफी अथलेटिक था – जिम-विम जाता होगा, एक हमेशा दुखी रहता था – किसी सोच में डूबा हुआ, एक बहुत खुश रहता था, और कुछ ऐसे  वर्ज़न भी थे जिन्हें मैं नहीं पहचानता था | एक अभिनेता होने के नाते मुझे इन सब से अच्छी तरह परिचित होना चाहिए, लेकिन अगर ऐसा होता मैं बहुत बड़ा स्टार न होता |
खैर, सब अपनी मस्ती में मस्त – तो मैंने सोचा पहले कॉमिक से शुरुआत की जाए| हालाँकि मैं खुद बहुत कॉमिक नहीं हूँ, पर मुझे कॉमिक लोग बहुत पसंद हैं – मन खुश रहता है इनके साथ | मैंने कॉमिक वाले को आवाज़ लगायी, आवाज़ तो निकली नहीं – कुछ बुलबुले उठे और जार के नीचे से ऊपर की ओर उठने लगे | उनको देख के मुझे बड़ा मज़ा आया – जैसे जार के बाहर वो बुलबुले वाली डिबिया होती है जिसमें प्लास्टिक का रिंग डुबोके हवा फूंको को बुलबुले बनते हैं, बिलकुल वैसे ही | बस यहाँ बुलबुले हवा में ठहरते नहीं बल्कि तेजी से ऊपर की ओर भागने लगते हैं| चलना  भी इतना आसान नहीं था| थोड़ा इशारा वगैरह किया, लेकिन उसका कुछ फायदा नहीं हुआ | बगल में खड़े सैड-फिलॉसफर को मैंने हाथ मार के इशारा किया की अगले को बुला दो, तो अगले को बुलाना तो दूर उसने खुद ही सुना-अनसुना कर दिया | मैंने कहा साला यह अजीब चक्कर है, फिर सोचा यह साले फिलॉसफर होते ही असामाजिक हैं | बगल में यह बहुत खुश रहने वाला प्राणी था – इसकी शकल से ही मुझे घृणा हो रही थी, पर क्या करें काम पड़ने पे गधे को भी बाप बनाना पड़ता है, मैंने अपने चेहरे पे हलकी मुस्कान साधी और उसको हाथ से थप-थपा के बात करने का प्रयास किया, लेकिन उसने मुड़ के देखा तक नहीं| मुझे लगा की यह साली अजीब परेशानी है – यह सब दिख तो मेरे ही जैसे रहे हैं, लेकिन कोई बात नहीं करना चाहता |इतने में किसी ने जार को उठाया, अचानक एक आशा जगी की चलो कुछ हुआ | जब भी हम लोग किसी घोर समस्या में पड़े होते हैं, तब कुछ भी होता है तो अच्छा लगता है, चाहे उससे समस्या का हल निकले या न निकले| ऐसा लगता है कुछ अच्छा ही होगा| जार गोल गोल घूमने लगा, जैसे हम लोगों को एक कानक्रीट मिक्सर में घुमाया जा रहा हो! मैंने सोचा हो न हो, अब तो कुछ हो ही जायेगा | और इस समय सबसे ज्यादा ज़रूरी है मेरा इस जार से बहार निकलना, तो सबसे पहले वही होगा | जब जार घूमना बंद हुआ तो देखा एक सुन्दर सुशील महीला जार को घूर घूर के निहार रही है – मुझे लगा मुझे देख रही है| कहीं कोई कास्टिंग डिरेक्टर तो नहीं, जिसको मैं पसंद आ गया हूँ| बड़ी-बड़ी सुन्दर आँखें! इतनी खूबसूरत आँखें मैंने पहले कभी नहीं देखीं, और वो भी इतने करीब से, इतने ध्यान से | वो एक पिंक रंग का टॉप पहने थी और उसपे छोटे-छोटे कई सारे फूल बने थे | पता नहीं उसके टॉप का रंग सही में पिंक था के नहीं, क्यूंकि मुझे तो सभी कुछ पिंक दिख रहा था | उसने अपनी भौओं को सिकोड़ा, तो मुझे लगा क्या मेरा चेहरा पसंद नहीं आया – फिर देखा की जार पे कुछ उलटे शब्द हैं, वो शायद उनको पढ़ने की कोशिश कर रही थी| ख्याल आते ही बड़ा दुःख हुआ – एक्टर होने के बहुत सारे नुक्सान हैं, उनमे से एक यह भी है – की आपकी दिशा में कोई देख रहा हो, तो आपको लगता है, हो न हो इसने मेरा टैलेंट पहचान लिया है | पूरी दुनिया एक बहुत बड़ा सा ऑडिशन लगता है – काफ्फी शॉप, मॉल, रोड, पार्टी, बुक-शॉप यहाँ तक की मंदिर भी | वो जार पे लिखे हुए न्यूट्रीशन फैक्ट्स पढ़ रही थी | फिर उसने जार जब चेहरे से थोड़ा दूर किया तो देखा की चटक-लाल लाली लगाये हुए है, और सर पे काला चश्मा टिकाया हुआ है – मैंने सोचा सत्यानाश हो इसका, मुझे तो यह भी एक्टर ही लग रही है | और भला भारत देश में न्यूट्रीशन फैक्ट्स कौन पढ़ता है?
उसने जब जार वापस शेल्फ पे रख दिया तो मुझे ऐसा लगा की अब मैं मर जाऊँगा, जैसे पानी में डूबता इंसान छटपटाता है, उसी तरह जोर जोर से चिल्लाने की कोशिश की, खूब हाथ पैर हिलाए| कुछ फायदा ना हुआ| वो जार को शेल्फ पे रख के लचकती, मटकती, ठुमकती हुई निकल गयी | मैंने कोशिश करके देखा तो उसने नीचे पीले रंग की हील्स पहनी हुयी थीं और मिनी मिनी-स्किर्ट पहना हुआ था| उसकी कमर में बेल्ट भी पीली थी | दोनों चीज़ों का रंग इतना चटक पीला था की मुझे पिंक शेड के बाद भी पीला ही दिख रहा था | पक्का हो गया की वो एक्ट्रेस ही थी – इतने बेहुदे रंग सिर्फ एक्टर्स पहन सकते हैं | खैर एक्टर हो ना हो मेरी बला से – मेरे तो किसी काम ना आई| फिर देखा तो मेरा कॉमिक वर्ज़न मुझे देख के मुस्करा रहा है – मुझे लगा शायद मेरी जींस की चेन खुली रह गयी होगी| मैं जब थोड़ा सहमा तो उसने इशारा किया की फिर से करूं, मैंने पूछा क्या? तो इशारे से बताने लगा हाथ पैर हिलाओ और बुलबुले निकालो| फिर समझ में आया की उसको मेरा वो छटपटाना पसंद आया – तो मैं जोर जोर से हाथ पैर हिला के चिल्लाने लगा, और वो ख़ुशी से पागल हो गया, उसने भी मुझे कॉपी किया और हम दोनों हंसने लगे | फिर मुझे अपने अगल बगल वालों का आभास हुआ, पर वो सब अभी भी अपने में मस्त थे – किसीको किसी से कोई सरोकार ना था | मुंह से पसंदीदा गालियाँ फूटने लगीं, लेकिन वो सब बुलबुले बन के उड़ गयीं| इसे देख के मेरा कॉमिक भाई और खुश हुआ|
जब बातचीत होने लगी तो एक दूसरे की बातें यों ही समझ में आने लगीं| यह बड़ा अजीब सा अनुभव था – अब जैसे बोलने की ज़रुरत ना थी – एक दूसरे से मन का रिश्ता सा हो गया| अच्छा लगा की चलो इस असामाजिक माहौल में एक साथी तो मिला | मैंने मन में उसका नाम जॉनी रख दिया – जॉनी वाकर मेरे बड़े प्रिय कलाकार हैं | कुछ भी और बात करने से पहले मैंने उससे कहा की यार इस जार में से कैसे निकला जाये? उसने कहाँ क्यूँ? मैंने कहाँ क्यूँ मतलब? तो बोला इस जार में से क्यूँ निकलना है? मैं इतना हैरान हुआ की मुझसे कुछ कहा ही नहीं गया – मैं बस उसका मुंह देखता रहा| फिर मुझे याद आया की आज शाम मुझे अंजना से मिलना भी है – इस पूरे हफ्ते मुलाकात नहीं हुई है| मैंने जॉनी को कहा की यार गर्लफ्रेंड से मिलने जाना है – तो उसने कहा अच्छा! कौन है? अंजना मेरी गर्लफ्रेंड है|
वो एक कंपनी में काम करती है | उससे रिश्ता बहुत ज़बरदस्त रिश्ता है – जीवन में चाहे कितनी भी परेशानियों हों, उससे मिलते ही सब गायब हो जाती हैं – हल नहीं, गायब हो जाती हैं| और जैसे ही वो आँखों से ओझल होती है, सारी तकलीफें फिर से आँखें फाड़ कर डराने लगती हैं | अंजू मेरी बहुत हौसला अफजाही करती है | शायद मेरे जीवन में सिर्फ वो ही है जो मेरी हौसला अफजाही करती है | कभी कभी मुझे लगता है की अंजू मुझसे प्रेम क्यूँ करती है? मैं न ही तो अमीर हूँ, न ही सफल अभिनेता हूँ, देखने में भी ऐसा कोई टॉम क्रूज़ नहीं हूँ – कुल मिला के बहुत ही सामान्य इंसान हूँ | उस दिन मैं और अंजू नैचुरल्स की आइस-क्रीम खा रहे थे और मैंने अचानक अंजू से कहा “यार तू किसी एक सफल बन्दे को पकड़ के शादी क्यूँ नहीं कर लेती?” | मैं सच में  एक मित्र जैसे उससे पूछ रहा था – उस समय मन में बिलकुल यह ख्याल न था, की अगर वो मेरे जीवन से चली गयी तो मेरा जीवन कितना सूना और निर्जन हो जाएगा| वो तुरंत बोली “एक बार करी तो थी”| मैं चुप हो गया | अंजू का डिवोर्स हुए कुछ डेढ़ साल हो चुका था – यह मेरे समझ से बाहर की बात थी की कोई अंजू को डिवोर्स दे सकता है – वो पढ़ी लिखी है, कमाती है, देखने में सुन्दर है (सेक्सी है), बात अच्छे से करती है | फिर यह सोच के लगा की साला मुझ में ऐसा क्या है? तो मैंने पूछ ही डाला “अंजू व्हाय डू यू लव मी?” | वो बोली “तुम मुझे बहुत हंसाते हो!” | उसने जैसे ही यह कहा तो मैं अपने दो पैरों पे खड़े होकर जीभ बहार निकालकर उसके ऊपर चढ़ने  को तैयार था और बस मन किया की उसको ऊपर से नीचे तक चाट डालूँ | आज तक किसी भी लड़की ने मुझसे यह नहीं कहा था की मैं उसे हंसाता हूँ| जैसा की मैंने पहले भी कहा कि मैं ऐसा कोई कॉमिक आदमी नहीं हूँ लेकिन अंजू को मैं हंसाता हूँ | शायद कुछ शख्सियत कुछ लोगों के साथ ही सामने आती है|
जॉनी यह सुनके बहुत खुश हुआ| उसने कहा “इससे तो मिलना पड़ेगा? अब तो तुम्हे इस जार से निकलना ही पड़ेगा”| मैंने पूछा “कुछ तरकीब बताओ?” उसने जार की दीवार को अपने नाखून से खरोचने की कोशिश की – शायद वो टेस्ट कर रहा था की कहीं जार प्लास्टिक का तो नहीं बना है, तो शायद किसी तरीके से उसको क्रैक किया जा सके| लेकिन वो परेशानी ही क्या जो यूं ही हल हो जाये | जार शीशे का बना हुआ था और हम चाहें कितना भी अपना माथा उसपे फोड़ लें, लेकिन उसको तोड़ नहीं पाएंगे |
हम दोनों साथ में बैठ के यह विचार करने लगे की क्या करें? हमने सोचा की कोई कॉमिक एक्ट तैयार करते हैं और किसी ग्राहक को लुभाने की कोशिश करते हैं, अगर किसी ने हमें देख लिया, हमारा एक्ट अगर उसे पसंद आ गया तो हो सकता है, कोई हमपे दया कर दे | जॉनी का साथ पाके बहुत अच्छा लग रहा था| परेशानी में कोई साथी मिल जाए, परेशानी हल चाहे न भी हो, परेशानी आधी हो जाती है | जीवन में साथी होना बहुत ज़रूरी है|
हम दोनों ने प्लानिंग शुरू की तो यह तय हुआ की हो न हो कोई फिजिकल एक्ट होना चाहिए, क्यूंकि बाहर से सिर्फ हमारी कलाबाजियां देखी जा सकती थीं और फिर अगर उसमें कुछ कहानी भी हो तो अच्छा है | हमें लगा की अगर हमारे साथ बाकी हम-जार भी हों तो ज्यादा प्रभावशाली प्रदर्शन किया जा सकता है | तो हमने औरों से बात करना शुरू की, मैं हैरान था की जॉनी के साथ होने से, लाइफ में थोड़ी कॉमेडी होने से, बाकी लोग भी बात करने को तैयार थे| और तो और उस सैड-फिलॉसफर के चेहरे पे भी एक हलकी मुस्कान आ गयी| अगर लाइफ में कॉमेडी न हो तो बड़ा मुश्किल से कटता है सफ़र – अब बताईये, अंजू भी मुझे इस लिए पसंद करती है क्यूंकि मैं उसे हंसाता हूँ, मुझे नहीं पता कैसे पर हंसाता हूँ |
हमने सैड-फिलॉसफर को जार की दीवार से लगा के बिठा दिया और प्लान किया की जैसे ही कोई हमारे शेल्फ की तरफ आता दिखेगा तो मैं और जॉनी उसको हंसाने की कोशिश करेंगे और बाकी लोग बैकग्राउंड में एक हल्का सा डांस करेंगे| अब मैं और जॉनी तैयार होने लगे की क्या-क्या कर सकते हैं – एक तो दोनों हाथ पकड़ के गोल गोल घूमके थोड़ा जार के पदार्थ में तैरेंगे, मुंह से बुलबुले निकालेंगे और फिर कुछ और कलाबाजियां करेंगे |  मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था की मैं ऐसा कुछ कर सकता हूँ लेकिन जब अपनी जान पे बन आये तो कुछ भी करना पड़ेगा|
अब  हम इंतज़ार में बैठ गए की कोई आये और हम अपना कार्यक्रम शुरू करें | थोड़ी देर में उधर एक बच्चा आता दिखा और मुझे लगा बहुत बढ़िया! इस दुनिया के बड़े बूढों से निराश, मुझे लगा हो न हो, यह बच्चा ही हमें बचाएगा| वो जैसे ही करीब आया हमने पूरे जोश से अपना कार्यक्रम शुरू कर दिया, लेकिन उसने हमारी तरफ देखा ही नहीं, फिर हमने अपने फिलॉसफर दोस्त को उठा लिया, हवा में उड़ा-उड़ा के फेंका, फिर भी उसने नहीं देखा | चेहरे बनाये, कलाबाजियां की, बुलबुले निकाले पर कमबख्त वो बच्चा बगल में रखे जैम की बोतल उठा के चलता हुआ|
अब मेरी हालत बिलकुल उस सैड-फिलॉसफर के जैसी हो गयी, लगा की अब तो जीवन भर इसी जार में बंद रहना पड़ेगा |
कल देर रात अमित से बात हो रही थी| अमित मेरा पुराना दोस्त है | कुछ ऐसे दोस्त होते हैं जिनसे चाहें सालों साल बात न करो, लेकिन जब बात करो तो ऐसा लगता है जैसे बात वहीं से शुरू हुयी हैं जहाँ पे छोड़ी थी | अमित भी कुछ वैसा ही दोस्त है मेरा | वह अमेरिका में सोफ्टवेयेर इंजिनियर है | कई सालों से वहां पे है, शादी हो चुकी है, एक बच्ची भी है | हम लोगों ने बचपन में बहुत समय साथ बिताया है, स्कूल में पढ़ाई का संघर्ष भी साथ में किया था | कभी कभी अमित का जीवन देख के बड़ी जलन सी होती है, वो साला इतना सीधे दिमाग का आदमी है की मुझे अपने आप से कोफ़्त हो जाती है, की आखिर मेरा मन इतना विचलित क्यूँ रहता है, क्यूँ कभी संतुष्ट नहीं होता | और सच पूछो तो ऐसा भी नहीं है की मैं एक्टिंग करके बड़ा सुखी हूँ, कोई बहुत बड़ा स्टार बनने की लालसा भी नहीं है| क्यूंकि वो इंजिनियर है उसे हर चीज एक फ्लो चार्ट जैसी दिखती है – यानि किसी भी चीज़ को करने के कुछ स्टेप्स हैं| जैसे अगर चाय बनानी है तो पहले गैस जलाओ, फिर पानी चढ़ाओ, उबल जाने पे दूध, चीनी डालो – कुछ इस तरह | सोचने में लगता है की कितना बेवकूफी भरा तरीका है, लेकिन सच में बड़े से बड़ा लक्ष्य इस तरह की सीढ़ी चढ़ने से हासिल किये जा सकते हैं, और जाने-अनजाने  में हम करते भी हैं | तो अमित कहने लगा चलो तुम्हारे सफल अभिनेता बनने के लिए क्या करना पड़ेगा? मैंने कहा यार अगर यह मुझे पता चल जाए तो फिर मुश्किल ही क्या है – फिर तो मैं सब कुछ कर ही डालूँ | इस धंधे की सबसे बड़ी समस्या यही है की इसका कोई निश्चित रास्ता नहीं है – देयेर इस नो मेथड इन दिस मैडनेस | तो वो कहना लगा यार यह कुछ उसी तरह है जैसे अपनी नयी कंपनी खोलना या अपनी दुकान खोलना – मैंने कहा हाँ| उसपे उसने कहा “यार कुछ भी अपना काम स्थापित करना बड़ा मुश्किल होता है, चाहे वो किसी भी फील्ड में हो! वर्ना तो सारा जीवन ऐसे ही कटता है जैसे एक बोतल में बंद हैं!”
और यह क्या मज़ाक है मैं इस जार में आके बंद हो गया हूँ | उतने में हमारा बॉडी बिल्डर भाई, मुझसे आके कहना लगा “तुम लोग मस्त उछल कूद कर लेते हो!”, मैंने और जॉनी ने एक दूसरे की ओर देखा और आशापूर्वक उठ खड़े हुए | कुछ ही देर में हमने जार के सारे निवासियों को साथ ले लिया था| हमने फिर से एक नई योजना बनायीं| इस बार हमने पिछली बार से भी बड़ा प्रोग्राम करने का निश्चय किया | हमने सोचा की इस बार हम सब लोग जार के अन्दर एक साथ डांस करेंगे, इस दीवार से उस दीवार, उस दीवार से इस दीवार | यह कुछ वैसा ही दिखने वाला था जैसा ओलिम्पिक्स में सिंक-डाइविंग होती है | अब हम लोग मन में दृढ़ निश्चय करके एक नए ग्राहक का इंतज़ार करने लगे |
कुछ ही समय में एक गर्भवती आंटी आती दिखाई दीं, मुझे लगा की यह ज़रूर अचार के शेल्फ से कुछ उठाएंगी | मैंने सब को चौकन्ना किया, वो हमारे शेल्फ से करीब पांच कदम दूर थीं जब मैंने ऊँगली से इशारा किया – वन, टू, थ्री! और हम लोग लगे इधर से उधर तैरने, जोर-जोर से| जार के अन्दर जैसे तूफ़ान सा आ गया, कुछ समझ नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है | सब कुछ हिलने लगा, ऐसा लगे जैसे भूकंप आ गया हो| किसी तरीके से बाहर देखा तो वो आंटी भी हमें अनदेखा किये आगे निकल गयीं थीं मैंने सबको रुकने का इशारा किया, सबने एक आखरी बार एक दीवार से धक्का लगाया और बीच में रुक गए| हम लोग तो रुक गए लेकिन अब जार हिल रहा था | जार धीरे धीरे हिल रहा था – एक तरफ से दूसरी तरफ | हम सब लोग चुप्पी साध के बस इंतज़ार कर रहे थे, के अब क्या होगा | जार धड़ाम से शेल्फ पे लुढ़क गया |
लुढ़का हुआ जार देख के मन में यह ख्याल आया की अरे अब तो इस जार को अगर जमीन पे गिरा दिया जाए तो इस जेल से मुक्ति हो जाये | लेकिन अब इस जार को गिराए कौन और कैसे | सामने के शेल्फ में कुछ अनाज की छोटी बोरियां रखी  हुयी थीं – दाल, चावल वगेरह | वहां पे कुछ कबूतर अनाज चुग  रहे थे | मैंने जॉनी से कहा यार किसी तरह अगर कोई कबूतर आकर पर मार दे तो यह जार ज़मीन पे गिर जाए और टूट जाए | पर हमको इस बात का विश्वास हो चुका था की हमारी कला अगर इंसानों को नहीं लुभा पायी तो कबूतरों का क्या लुभाएगी|
उन कबूतरों को देख के मन में बड़ी जलन हुई | उनके फड़फड़ाते पंखों को देख के मन में बिलकुल वैसी ही चेष्टा हुई जैसी किसी भिखारी को बी एम् डब्लू में बैठे सेठ को देख कर होती होगी | ऐसी चेष्टा मुझे भी अपने निजी जीवन में होती है – जब किसी फिल्म स्टार के निठल्ले बेटे को फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने को मिलती है | लेकिन अब जो है सो है | वैसा ऐसा तो है नहीं के सभी फिल्म स्टारों के बेटे सफल अभिनेता है – तमाम ख़ाक छानते फिरते हैं | मन में फिर निश्चय किया – अगर जार को गिरा लिया है तो ज़मीन पे भी गिरा ही लेंगे |
अब फायदा यह था की मेरे सभी हम-जार मेरे साथ थे| जैसे हमने पहले इकठ्ठा जोर लगाया था, अबकी उसी प्रकार जोर लगाने का प्लान  बनाया और जार को शेल्फ से नीचे लुढ़काने का इरादा पक्का किया | हम सब लोग जार के सतह पे पहुँच गए और धीरे धीरे जार को शेल्फ के किनारे की तरफ बढ़ाने लगे | इस बार सफलता तय है – अब कौन रोक सकता है इस जार को टूटने से | मगर शेल्फ की किनारी पे एक हलकी से उठी हुई किनारी थी जिसने हमारी सारी गति शक्ति को शून्य कर दिया | इतना हुआ की जार उलटी शेल्फ की तरफ वापिस लुढ़कने लगा | अब सब लोगों की हिम्मत टूट चुकी थी, सबने हाथ खड़े कर दिए और जॉनी बोला की भाई अब तू ऐसा कर अपनी गर्ल-फ्रेंड को यहीं बुला ले | मैंने लोगों से प्रार्थना की कि बस एक बार और – आखरी बार |  “इस बार इतना जोर लगाना है की हम सब एक समान हो जाएँ, एक दूसरे में कोई अंतर न रह जाये और इसके बाद तन मन में ज़रा भी उर्जा न बचे” | बजरंग बली का नाम लेके हमने शेल्फ के पिछले हिस्से से जार को लुढकाना शुरू किया, सबने नारा लगाया “जोर लगा के हय्षा”, जार की गति बढ़ने लगी, जार की गति और बढ़ी और किनारे पहुँचने से पहले जार इतना तेज़ लुढ़कने लगा की हम सब लोगों को सुध न रही की क्या हो रहा है | फिर एक जोर का झटका लगा |
उस झटके के बाद के कुछ पल अद्भुत  थे, हम लोग गुरुत्वाकर्षण मुक्त होकर हवा में उड़ रहे थे | हमारे दिलों ने धड़कना बंद कर दिया, आँखें खुली की खुली रह गयीं, जार के बाहर की सारी दुनिया जोर से भागती हुई दिखाई दी, एक इतनी गहरी सांस भरी जैसे दुबारा सांस लेने की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी| फिर कुछ क्षण ऐसा लगा जैसे मैं अपने सीमित शरीर में नहीं बल्कि एक बहुत बड़े विस्तार में पहुँच गया हूँ| मेरे सम्पूर्ण जीवन का भी आकर्षण इन कुछ क्षणों के बराबर न था |
फिर अचानक जोर से कांच टूटने की आवाज़ आई, जार चकना चूर हो चुका था और मेरे सारे हम-जार गायब हो गए, मैं अकेला उस गुलाबी पदार्थ में पड़ा था |
मैं चट से उठा और भागा वहां से ऑडिशन के लिए |
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11 Comments

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  1. nityanandgopalika / May 3 2012 1:29 pm

    बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने. चलिए अब ऑडिशन का आनंद लीजिये.

  2. Apurva / May 12 2012 3:34 pm

    Nice one Gyanesh…

  3. Sangeeta / May 13 2012 6:55 am

    It’s been ages, I read something in Hindi. Very long back, nandan, chandamama an other comics. Very creative imagination, and excellent write

    • gyaneshpandey / May 15 2012 6:41 am

      Thanks Sangeeta. Writing in Hindi feels very different and personal.

  4. मथुरा कलौनी / May 29 2012 12:13 pm

    लेखकों के बारे में सुना था कि वे कल्‍पना में उड़ान भरते हैं। यह तुम कहॉं जार में बन्‍द हो गये। तभी जो कहूँ कि उस दिन जब अरोमा में मिले थे तो इतने बदले बदले क्‍यों लग रहे थे। चलो प्रसन्‍नता की बात है कि जार जार-जार हो गया है। वैसे, अच्‍छी उड़ान भरी है तुमने।

    • gyaneshpandey / May 29 2012 9:40 pm

      सर हमारे अज्ञान की सीमा नहीं है – अभी तो समझे हैं की जार में घुसने के लिए भी तो उड़ना पड़ता है| आभार – आपके कमेंट्स के लिए |

  5. Chaitanya Jee Srivastava / Jun 1 2012 10:46 pm

    Have you read “Metamorphosis” by Franz Kafka? Padho! You have written something on that line and you have done full justice. The above is brillaint. Many congratulations. You seem to have a great future. God bless you!

    • gyaneshpandey / Jun 2 2012 12:41 am

      Hi Chaitanya – Thanks for your comments, compliments & wishes. Have we met?

  6. Rajat Yadav / Jun 2 2012 3:56 pm

    कल्पनाएँ, हकीकत के धरातल पर,
    उतरी है कलम के सहारे,
    जब रचे है किसी लेखक-कवि ने,
    स्वांग अदभुत-विचित्र-न्यारे।

    Enjoyed your post 🙂

  7. Nishant / Jun 15 2012 2:24 pm

    sahi likha hai, padh ke ras aagaya, achaar khaane ki to ichhaa nahin hui bas mera bhi lislise, tel bhare, mulayam aur kade tukdo waale achaar ke jaar ko tod ke bhaag chhootne hone ka mann karne lagaa hai…

  8. sonal / Oct 16 2012 6:05 pm

    it was long post but tried to read it all , beautifully written in hIndi .

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